Tuesday, October 18, 2011

अर्ज़ है.....

1.अब नए साल की मोहलत नहीं मिलाने वाली
आ चुके अब तो शब् -ओ -रोज़ अज़ाबों वाले [Ahmed Faraz]

2.मुन्तजिर फूल में खुश्बू की तरह हूँ कब से -
कोई झोंके की तरह आये उड़ा ले जाए .. [Bashir Badr]


खुदा से मैंने एक दुआ मांगी दुआ में अपनी मौत मांगी-2
खुदा ने कहा तुझे तो मौत दे दूँ मगर उसे क्या दू जिसने दुआ में तेरी जिन्दगी मांगी .....(DIL-SE)