Sunday, November 6, 2011

इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी न था ...

1.जितना मायूस है  वो  शख्स  बिछड़  कर  मुझ  से
इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी न था ...

2.जिनकी जैसी थी तबियत हमे वैसा जाना 
   कहीं महबूब हुयें हम तो कहीं मातूब हुयें हम 

३.बहुत कुछ और है जामने में , 
  ये दुनिया महज़ गम हीं गम तो नहीं 

४.मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मखसूस होतें हैं
ये वो नगमा है जो हर साज़ पे गाया नहीं जाता