उनके देखने से जो आ जाते हैं रुख पे रौनक
वो समझते हैं की बीमार का हाल अच्छा है .
''ग़ालिब''
अब किस-किस की मिशाल दूँ तुमको
हर सितम बेमिशाल करते हो .
''ग़ालिब''
हाथों की लकीरों पे मत जा "ग़ालिब "
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते
''ग़ालिब''
अब तो घबरा के यह कहते हैं कि मर जाएंगे
मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएंगे
मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएंगे
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